🔸गोवा का नाम सुनते ही सभी का मन खुश हो जाता है । यहाँ प्रकृति, आबोहवा और जीवनशैली के कारण ही पर्यटक खुद-ब-खुद यहाँ खिंचे चले आते हैं । गोवा हमारे महाराष्ट्र के दक्षिण में अरब सागर के पास स्थित है । लेखक विनय शर्मा अपने परिवार और उनके साढू साहब के परिवार के साथ गोवा पहुँचे । इंदौर ( जिला) और खंडवा (प्रमुख शहर) मध्य प्रदेश में स्थित है । (साढू अर्थात लेखक के साली का पति)
🔸लेखक का परिवार और साढू साहब का परिवार 23 नवंबर को गोवा एक्सप्रेस
से मड़गाँव पहुँचे । टैक्सी में बैठने के बाद शीतल हवा के झोंकों से लेखक का मन प्रसन्न हुआ और उनकी सारी थकान मिट गई । वे सोचने लगे कि पर्यटन का भी अपना ही आनंद होता है । जीवन में आने वाली समस्याओं से निजात पाने का सबसे आसान तरीका पर्यटन ही है । लेखक बताते हैं कि बदले हुए वातावरण के कारण मन तरोताजा हो जाता है और शरीर को विश्राम मिल जाता है ।
लेखक मड़गाँव से 5 किलोमीटर दूर कस्बे अर्थात छोटा शहर बेनालियम के एक resort अर्थात होटल में आकर रुक गए । आराम करने के लिए अपने- अपने suite में अर्थात कमरे में चले गए ।
🔸लेखक का परिवार और साढू साहब का परिवार 23 नवंबर को गोवा एक्सप्रेस
से मड़गाँव पहुँचे । टैक्सी में बैठने के बाद शीतल हवा के झोंकों से लेखक का मन प्रसन्न हुआ और उनकी सारी थकान मिट गई । वे सोचने लगे कि पर्यटन का भी अपना ही आनंद होता है । जीवन में आने वाली समस्याओं से निजात पाने का सबसे आसान तरीका पर्यटन ही है । लेखक बताते हैं कि बदले हुए वातावरण के कारण मन तरोताजा हो जाता है और शरीर को विश्राम मिल जाता है ।
लेखक मड़गाँव से 5 किलोमीटर दूर कस्बे अर्थात छोटा शहर बेनालियम के एक resort अर्थात होटल में आकर रुक गए । आराम करने के लिए अपने- अपने suite में अर्थात कमरे में चले गए ।
गोवा राज्य दो भागों में बँटा हुआ है । इसकी राजधानी पणजी मांडवी नदी के किनारे स्थित है । समुद्री इलाका होने के कारण यहाँ के मौसम में प्राय: उमस अर्थात नमी युक्त गर्मी बनी रहती है ।मुंबई जितनी गर्मी यहाँ महसूस नहीं होती । यहाँ हरियाली भरपूर है फिर भी धूप तो तीखी ही होती है ।
गोवा अपने खूबसूरत सफेद रेतीले तटों, महँगे होटलों तथा खास जीवनशैली के लिए जाना चाहता है इसके बावजूद यहाँ एक सांस्कृतिक विरासत भी बनी हुई है ।
🔸लेखक शाम को बेनालियम बीच की ओर चले पड़े । दिनभर की उमस भरी गर्मी के बाद शाम को बीच पर जाना लेखक को बड़ा अच्छा लगा । समुद्र की लहरों की आवाज किसी रणभेदी की तरह अर्थात युद्ध की शुरुआत में नगाड़े बज रहे हो ऐसा लग रहे था । बच्चे रेत का घर बनाने में जुट जाते और लहरें उनका घर गिरा देती । दूसरी लहर आने के पहले बच्चे फिर नया घर बनाने में जुट जाते हैं । यही क्रम चलता रहा । लेखक ने बच्चों से सीखा कि जीवन में आशावाद हो तो कोई काम असंभव नहीं है । समुद्र की हर लहर कह रही हो कि बनने के बाद मिटना ही नियति अर्थात प्रकृति का नियम है । यही जीवन का सत्य भी है ।
🔸बेनालियम के किनारे पर लेखक ने देखा कि कुछ पक्षी टीं-टीं-टीं की आवाज लगाते हुए मछलियों का शिकार कर रहे हैं ।पक्षी कभी-कभी सुस्ताने के लिए अर्थात थकान के बाद विश्राम करने के लिए किनारे बैठ जाते हैं। कुछ कुत्ते भी मछलियों का शिकार करने का प्रयास कर रहे हैं। पक्षियों का बैठना, कुत्तों का दौड़ना और पक्षियों का टीं- टीं- टीं कर उड़ जाना, यह दृश्य सैलानियों अर्थात पर्यटकों का अच्छा मनोरंजन कर रहा था I सूर्यास्त होते ही चंद्रमा की चाँदनी में समुद्र का नया चेहरा ही नजर आने लगा | अब समुद्र और स्याह अर्थात काला और भयावह दिखने लगा ।
🔸दूसरे दिन लेखक ने Bus के द्वारा गोवा घूमने की योजना बनाई । यहाँ sea food🦑🍤 की अधिकता होने के कारण स्वादिष्ट शाकाहारी भोजन मिलना काफी मुश्किल होता है l (sea food - fish 🐟 , crab 🦀 etc. ) यहाँ गोवा में शाकाहारी भोजन मिलना मुश्किल था इसलिए लेखक अपने परिवार के साथ होटल के कमरे में उपलब्ध kitchen 👨🍳में ही खाना बनाते थे ।
गोवा में छोटे-बड़े करीब 40 beach हैं लेकिन प्रमुख सात या आठ ही हैं । लेखक अंजुना बीच पहुँचे । अंजुना बीच नीले पानी वाला, पथरीला बहुत ही खूबसूरत है । नीला पानी काले पत्थरों पर पछाड खाता रहता है । पानी ने काट-काटकर इन पत्थरों में कई छेद कर दिए हैं जिससे ये पत्थर कमजोर भी हो गए हैं । पत्थरों के बीच पानी भरने से वहाँ काई ने (मराठीत - शेवाळ ) अपना घर बना लिया था । अंजुना बीच पर घूमने का अपना अलग आनंद है । यहाँ युवाओं का दल तो अपनी मस्ती में डूबा रहता है इसलिए परिवार के साथ आए पर्यटकों को अपने बच्चों का खास ध्यान रखना पड़ता है।
🔸बेनालियम बीच रेतीला तथा उथला है । यहाँ सुबह-सुबह बड़ी मात्रा में मछलियाँ पकड़ी जाती है लेकिन इतनी सारी मछलियाँ स्थानीय बाजारों में ही बेची जाती हैं । इनका निर्यात बिल्कुल भी नहीं होता।
🔸अंजुना बीच गहरा और नीले पानी वाला है । यह बॉलीवुड की पहली पसंद है । यहाँ कई हिट फिल्मों की शूटिंग हुई है । दोनों बीच व्यावसायिक है पर मूल अंतर व्यवसाय की प्रकृति का है I मेरे ख्याल से इसका मतलब बेनालियम बीच पर मछलियाँ पकड़ कर पैसा कमाया जाता है और अंजुना बीच पर फिल्मों की शूटिंग करने से पैसा कमाया जाता है ।🎥📽️
🔸इसके बाद लेखक और उनके साढू साहब अपने परिवार के साथ पणजी शहर देखने चले गए । शाम को कलिंगवुड बीच पर पहुँचे । यह काफी रेतीला तथा गोवा का सबसे लंबा बीच है जो 3 से 4 किलोमीटर तक फैला है ।यह स्थानीय लोगों के व्यवसाय का केंद्र भी है I यहाँ वॉटर स्पोर्ट्स की भी सुविधा है लेखक ने कई खेलों में हिस्सा लिया | उन्हें सबसे अधिक रोमांच पैराग्लाइडिंग में आया । पैराग्लाइडिंग करना करते समय लेखक और उनकी पत्नी डर भी रहे थे और खुश भी हो रहे थे I डर इस बात का था कि छूट गए तो समझो हमेशा के लिए चले गए और खुशी इस बात की थी कि इतना रोमांचक दृश्य - (काफी ऊँचाई से अथाह जलराशि को देखना) वह पहली बार देख रहे थे।
लेखक यहाँ चार - छह दिन रहे लेकिन उनके एक दिनचर्या बनी रही I सुबह जल्दी उठना, फटाफट नाश्ता करना और दिन भर घूम-फिर कर थककर शाम को resort आकर थकान मिटाने के लिए pool में तैरना !
एक दिन कोलवा बीच पर उन्होंने भी boating का आनंद लिया I वहाँ उन्होंने डॉल्फिन मछलियाँ दे देखीं । हालाँकि छोटी थीं पर बच्चों ने अच्छा आनंद लिया ।
🔸लेखक नवंबर के अंत में गए थे इसलिए वहाँ नवरात्रि और दशहरा का पर्व देखने को मिला। उन्होंने देखा कि वहाँ घर तथा गली-मोहल्ले में दुर्गा माँ की घटस्थापना की जाती है । लड़कियों द्वारा गरबा कर पर्व मनाया जाता है । यहाँ रावण का पुतला कहीं भी नहीं जलाया जाता । दूसरे दिन लोग अपने वाहनों की सफाई कर उनकी पूजा करते हैं । शाम को भगवान को एक पालकी में बिठाकर मंदिर ले जाते हैं । इसके बाद एक विशेष पेड़ की पत्तियाँ तोड़कर लोग एक-दूसरे को देकर बधाई देते हैं । (आपटयाची पाने - सोनं घ्या सोन्यासारखं रहा )
इतने कम दिनों में लेखक गोवा को पूरा तो देख और समझ नहीं पाए लेकिन इतना जरूर समझ गए कि पश्चिमीमें फैशन और सभ्यता में रचा बसा होने के बावजूद यह भारतीय संस्कृति को पूरी तरह से आत्मसात किए हुए हैं । पर्यटक यहाँ के फैशन के रंग में रंग जाते हैं लेकिन यहाँ के स्थानीय लोग अपनी सांस्कृतिक परंपरा को अब भी पकड़े हुए हैं ।
प्रस्तुति : डी. पी. सुतार, आदर्श प्रशाला, कोल्हापूर🔸
🔸लेखक शाम को बेनालियम बीच की ओर चले पड़े । दिनभर की उमस भरी गर्मी के बाद शाम को बीच पर जाना लेखक को बड़ा अच्छा लगा । समुद्र की लहरों की आवाज किसी रणभेदी की तरह अर्थात युद्ध की शुरुआत में नगाड़े बज रहे हो ऐसा लग रहे था । बच्चे रेत का घर बनाने में जुट जाते और लहरें उनका घर गिरा देती । दूसरी लहर आने के पहले बच्चे फिर नया घर बनाने में जुट जाते हैं । यही क्रम चलता रहा । लेखक ने बच्चों से सीखा कि जीवन में आशावाद हो तो कोई काम असंभव नहीं है । समुद्र की हर लहर कह रही हो कि बनने के बाद मिटना ही नियति अर्थात प्रकृति का नियम है । यही जीवन का सत्य भी है ।
🔸बेनालियम के किनारे पर लेखक ने देखा कि कुछ पक्षी टीं-टीं-टीं की आवाज लगाते हुए मछलियों का शिकार कर रहे हैं ।पक्षी कभी-कभी सुस्ताने के लिए अर्थात थकान के बाद विश्राम करने के लिए किनारे बैठ जाते हैं। कुछ कुत्ते भी मछलियों का शिकार करने का प्रयास कर रहे हैं। पक्षियों का बैठना, कुत्तों का दौड़ना और पक्षियों का टीं- टीं- टीं कर उड़ जाना, यह दृश्य सैलानियों अर्थात पर्यटकों का अच्छा मनोरंजन कर रहा था I सूर्यास्त होते ही चंद्रमा की चाँदनी में समुद्र का नया चेहरा ही नजर आने लगा | अब समुद्र और स्याह अर्थात काला और भयावह दिखने लगा ।
🔸दूसरे दिन लेखक ने Bus के द्वारा गोवा घूमने की योजना बनाई । यहाँ sea food🦑🍤 की अधिकता होने के कारण स्वादिष्ट शाकाहारी भोजन मिलना काफी मुश्किल होता है l (sea food - fish 🐟 , crab 🦀 etc. ) यहाँ गोवा में शाकाहारी भोजन मिलना मुश्किल था इसलिए लेखक अपने परिवार के साथ होटल के कमरे में उपलब्ध kitchen 👨🍳में ही खाना बनाते थे ।
गोवा में छोटे-बड़े करीब 40 beach हैं लेकिन प्रमुख सात या आठ ही हैं । लेखक अंजुना बीच पहुँचे । अंजुना बीच नीले पानी वाला, पथरीला बहुत ही खूबसूरत है । नीला पानी काले पत्थरों पर पछाड खाता रहता है । पानी ने काट-काटकर इन पत्थरों में कई छेद कर दिए हैं जिससे ये पत्थर कमजोर भी हो गए हैं । पत्थरों के बीच पानी भरने से वहाँ काई ने (मराठीत - शेवाळ ) अपना घर बना लिया था । अंजुना बीच पर घूमने का अपना अलग आनंद है । यहाँ युवाओं का दल तो अपनी मस्ती में डूबा रहता है इसलिए परिवार के साथ आए पर्यटकों को अपने बच्चों का खास ध्यान रखना पड़ता है।
🔸बेनालियम बीच रेतीला तथा उथला है । यहाँ सुबह-सुबह बड़ी मात्रा में मछलियाँ पकड़ी जाती है लेकिन इतनी सारी मछलियाँ स्थानीय बाजारों में ही बेची जाती हैं । इनका निर्यात बिल्कुल भी नहीं होता।
🔸अंजुना बीच गहरा और नीले पानी वाला है । यह बॉलीवुड की पहली पसंद है । यहाँ कई हिट फिल्मों की शूटिंग हुई है । दोनों बीच व्यावसायिक है पर मूल अंतर व्यवसाय की प्रकृति का है I मेरे ख्याल से इसका मतलब बेनालियम बीच पर मछलियाँ पकड़ कर पैसा कमाया जाता है और अंजुना बीच पर फिल्मों की शूटिंग करने से पैसा कमाया जाता है ।🎥📽️
🔸इसके बाद लेखक और उनके साढू साहब अपने परिवार के साथ पणजी शहर देखने चले गए । शाम को कलिंगवुड बीच पर पहुँचे । यह काफी रेतीला तथा गोवा का सबसे लंबा बीच है जो 3 से 4 किलोमीटर तक फैला है ।यह स्थानीय लोगों के व्यवसाय का केंद्र भी है I यहाँ वॉटर स्पोर्ट्स की भी सुविधा है लेखक ने कई खेलों में हिस्सा लिया | उन्हें सबसे अधिक रोमांच पैराग्लाइडिंग में आया । पैराग्लाइडिंग करना करते समय लेखक और उनकी पत्नी डर भी रहे थे और खुश भी हो रहे थे I डर इस बात का था कि छूट गए तो समझो हमेशा के लिए चले गए और खुशी इस बात की थी कि इतना रोमांचक दृश्य - (काफी ऊँचाई से अथाह जलराशि को देखना) वह पहली बार देख रहे थे।
लेखक यहाँ चार - छह दिन रहे लेकिन उनके एक दिनचर्या बनी रही I सुबह जल्दी उठना, फटाफट नाश्ता करना और दिन भर घूम-फिर कर थककर शाम को resort आकर थकान मिटाने के लिए pool में तैरना !
एक दिन कोलवा बीच पर उन्होंने भी boating का आनंद लिया I वहाँ उन्होंने डॉल्फिन मछलियाँ दे देखीं । हालाँकि छोटी थीं पर बच्चों ने अच्छा आनंद लिया ।
🔸लेखक नवंबर के अंत में गए थे इसलिए वहाँ नवरात्रि और दशहरा का पर्व देखने को मिला। उन्होंने देखा कि वहाँ घर तथा गली-मोहल्ले में दुर्गा माँ की घटस्थापना की जाती है । लड़कियों द्वारा गरबा कर पर्व मनाया जाता है । यहाँ रावण का पुतला कहीं भी नहीं जलाया जाता । दूसरे दिन लोग अपने वाहनों की सफाई कर उनकी पूजा करते हैं । शाम को भगवान को एक पालकी में बिठाकर मंदिर ले जाते हैं । इसके बाद एक विशेष पेड़ की पत्तियाँ तोड़कर लोग एक-दूसरे को देकर बधाई देते हैं । (आपटयाची पाने - सोनं घ्या सोन्यासारखं रहा )
इतने कम दिनों में लेखक गोवा को पूरा तो देख और समझ नहीं पाए लेकिन इतना जरूर समझ गए कि पश्चिमीमें फैशन और सभ्यता में रचा बसा होने के बावजूद यह भारतीय संस्कृति को पूरी तरह से आत्मसात किए हुए हैं । पर्यटक यहाँ के फैशन के रंग में रंग जाते हैं लेकिन यहाँ के स्थानीय लोग अपनी सांस्कृतिक परंपरा को अब भी पकड़े हुए हैं ।
प्रस्तुति : डी. पी. सुतार, आदर्श प्रशाला, कोल्हापूर🔸
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